Tuesday, March 17, 2026
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हनीमून या कोई बला? जब पहाड़ में नेटवर्क जाते ही छिड़ गया रस्मों पर घमासान, फिल्म ने रिलीज से पहले जीते कई अवार्ड

Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie Published : Mar 16, 2026 11:50 am IST, Updated : Mar 16, 2026 11:50 am IST

एक फिल्म रिलीज होने से पहले ही सुर्खियों में हैं। फिल्म को कई अवॉर्ड भी मिल गए हैं। इस फिल्म की कहानी हनीमून पर कपल के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी कैसी है जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें।

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Image Source : PRESS KIT फिल्म से एक सीन।

बॉलीवुड में सटायर (व्यंग्य) आधारित फिल्मों का अपना एक अलग दर्शक वर्ग है, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर चोट करने वाली कहानियों को पसंद करता है। इसी कड़ी में उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों और वहां की ग्रामीण विडंबनाओं को समेटे हुए फिल्म 'हनीमूनाय नमः' चर्चा में है। रिलीज से पहले ही कई पुरस्कार अपने नाम कर चुकी यह फिल्म पहाड़ के उन गांवों की कहानी कहती है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं और मोबाइल नेटवर्क का अभाव है। फिल्म में गंभीरता के बजाय हास्य के जरिए व्यवस्था और अंधविश्वास पर करारा प्रहार किया गया है।

नेटवर्क की लुकाछिपी और हनीमून का डर

फिल्म की कहानी उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में रहने वाले 'मोना' के इर्द-गिर्द घूमती है। मोना एक पढ़ा-लिखा लेकिन बेहद भोला युवक है, जिसकी शादी पड़ोस के गांव की लड़की 'वर्षा' से तय होती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब मोना अपने अमेरिका में रहने वाले दोस्त को फोन करता है। दोस्त शादी में तो नहीं आ पाता, लेकिन जाते-जाते मोना को 'हनीमून की रस्म' अच्छी तरह निभाने की सलाह दे देता है। इससे पहले कि मोना इस रस्म की बारीकियां समझ पाता, मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाता है। यहीं से शुरू होता है भ्रम और हास्य का सिलसिला। गांव के सीधे-साधे लोगों के लिए 'हनीमून' एक अनजानी बला बन जाता है। महिलाओं के बीच चर्चा शुरू हो जाती है और गांव की देवी से इस अज्ञात 'संकट' से बचाने की प्रार्थना की जाने लगती है। यहां तक कि गांव का पंडित भी इस शब्द के आगे लाचार नजर आता है।

पंचायत, राजनीति और अंधविश्वास का जाल

बात जब पंचायत तक पहुंचती है तो हर कोई अपने-अपने ज्ञान के हिसाब से इसकी व्याख्या करने लगता है। धीरे-धीरे यह रस्म एक बड़े मुद्दे में तब्दील हो जाती है। इस बीच, राजनीतिक फायदा उठाने वाले लोग भी सक्रिय हो जाते हैं और अपनी रोटियां सेंकने के लिए साजिशें रचने लगते हैं। स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि मोना और वर्षा का विवाह टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। अंत में, मोना अपनी सूझबूझ से एक पुराने अंधविश्वास की जड़ को खोज निकालता है और मामले को शांत करता है। फिल्म की खूबसूरती यह है कि इस पूरी आपाधापी में गांव की परंपरा, आस्था और विश्वास को ठेस पहुंचाए बिना एक बड़ा संदेश दिया गया है।

honeymoonay namah
Image Source : PRESS KITफिल्म की कास्ट।

प्रतिभाशाली कलाकारों और टीम का संगम

शिवाक्षय एंटरटेनमेंट और नवांकुर फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता अक्षय बाफिला और अक्षय देसाई हैं, जबकि निर्देशन निशांत भारद्वाज ने किया है। फिल्म में कलाकारों की एक लंबी सूची है, जिसमें अक्षय बाफिला, सोनम ठाकुर, हेमलता भारद्वाज और निशांत भारद्वाज मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की पटकथा और संवाद भी निशांत भारद्वाज ने लिखे हैं, जबकि संगीत की जिम्मेदारी अक्षय बाफिला ने संभाली है। खास बात यह है कि फिल्म में उत्तराखंड का एक लोकगीत भी शामिल किया गया है, जो दर्शकों को पहाड़ की संस्कृति से जोड़ने का काम करता है। पार्थ जोशी और सिनेमो सनी की सिनेमैटोग्राफी ने उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य को पर्दे पर उतारने का प्रयास किया है।

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